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छलयुग का कोरस – हरिवंश राय बच्चन

bachchan

 

अब्बर देवी जब्बर बकरा
तागड़ धिन्ना नागर बेल


छोटा नाम बड़ा पर दर्शन
महिमा और बड़ी मशहूर
उस से और बड़े हैं पण्डे
सत्ता-भत्ता मद में चूर
भेंट चढ़ाएं, धक्के खाएं,

भगत मचाएं वे रंगेल

अब्बर देवी जब्बर बकरा
तागड़ धिन्ना नागर बेल

 

गाँधी की आंधी आयी थी
बीते लगभग बरस पचास
अपने साथ सपन लाई थी
सब कुछ होगा सबके पास
वादों की लादी भर जनता,

आज रही है कांधों झेल

अब्बर देवी जब्बर बकरा
तागड़ धिन्ना नागर बेल

 

आसन भी है शासन भी है
अफसर, दफ्तर, फाईल, नोट
पुलिस, कचेहरी, पलटन, सलटन
सब से ताकतवर है वोट

वोट नहीं क्यूं पाया तुमने
तिकड़मबाजी में तुम फेल

 अब्बर देवी, जब्बर बकरा
तागड़ धिन्ना नागर बेल

 

गुल समाजवादी समाज का
पूंजीवाद खिला चहुँ ओर
कलकत्ते की ओर चले थे
पहुंचे जा कर जैसलमेर

बहुत दिनों पर भेद खुला है

ऊँट रहा है खेंच नकेल

अब्बर देवी जब्बर बकरा
तागड़ धिन्ना नागर बेल

 

आय इकाई, खर्च दहाई
प्लान सैंकड़ों, क़र्ज़ हज़ार
खर्च लाख में, साख अभी है
देता है हर देश उधार
पंद्रह पीढ़ी गिरवी रख दी

लीडरजी ने जूआ खेल
अब्बर देवी जब्बर बकरा
तागड़ धिन्ना नागर बेल

 

गाँठ बंधी है किस नारी से
किस नारी से है व्यभिचार
इज्जत, नीति, हया, मर्यादा
धोकर पी बैठी सरकार
घर की रानी पानी भरती,

सर पर करती राज रखेल ,

अब्बर देवी, जब्बर बकरा
तागड़ धिन्ना नागर बेल

 

तीन पंक्ति की कविता निकली
तीस पेज का निकला लेख
तीन टांग की बछिया व्याई
ताऊ गाड़े छत्तीस मेख
सींग हिलाता, है पगुराता,

हमने देखा बुढवा बैल

अब्बर देवी जब्बर बकरा
तागड़ धिन्ना नागर बेल.

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