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बन्द गली के आखिरी मुकाम पर सीरिया

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स्टेनली जॉनी

अकेले असद ही नहीं, सभी लोग जिम्मेदार हैं

सीरिया में गृहयुद्ध पाँचवे वर्ष में प्रवेश कर रहा है. इस अवसर पर यूएनडीपी के सहयोग से सीरिया सेन्टर फॉर पॉलिसी रिसर्च द्वारा तैयार की गयी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस युद्ध ने देश की 80 फीसदी आबादी को गरीबी में डुबो दिया है, जीवन प्रत्याशा को 20 वर्ष कर दिया है और अर्थव्यवस्था को अनुमानतः 200 अरब डॉलर का नुकसान पहुँचाया है. लगभग 2.2 लाख लोग मारे गये. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून कहते हैं- “लगभग तीस लाख सीरियाई लोग अपनी नौकरी गँवा चुके हैं, जिसका मतलब है कि एक करोड़ बीस लाख लोगों ने अपनी आय का प्राथमिक स्रोत खो दिया है.” किसी भी मापदंड से, देश एक मानवीय विनाश का सामना कर रहा है.

जिम्मेदर कौन है? पश्चिमी देश कहते हैं कि राष्ट्रपति बसर-अल-असद जिम्मेदार हैं. असद का दावा है कि वे आतंकवाद से लड़ रहे हैं. सउदी अरब और तुर्की कहते हैं कि असद ईरान की कठपुतली है, ज़बकि तेहरान सुन्नी सत्ता पर उग्रवादियों का समर्थन करने का आरोप लगाता है. अगर पूरी तस्वीर को समग्रता में देखें, तो यह स्पष्ट है कि ये सब के सब खिलाड़ी इस संकट के लिए जिम्मेदार हैं. चार साल पहले असद द्वारा वहाँ शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के बर्बर दमन घटना ने प्रदर्शनकारियों को हथियारबन्द संघर्ष की ओर धकेल दिया. ज़ल्दी ही, सउदी अरब के नेतृत्व में खाड़ी देशों ने विद्रोहोयों का समर्थन शुरू किया क्योंकि वे ईरान और रूस के संश्रयकारी असद को पश्चिमी एशिया के सत्ता समीकरण से बाहर करना चाहते थे. इस काम में पश्चिमी देशों ने भी उनका साथ दिया.

ईरान और रूस ने आक्रामक तरीके असद सरकार का समर्थन किया. देखते-देखते सीरिया एक भौगोलिक युद्धक्षेत्र बन गया. राज्य की तबाही और किसी विस्वसनीय विरोधी पक्ष के आभाव ने इस्लामी समूहों को भरपूर अवसर प्रदान किया. आज के सीरिया के लिए जो बेहतरीन पटकथा है, वह आज से चार साल पहले बदतरीन था. आज भी देश का ज़्यादातर आबाद इलाका असद के नियंत्रण में है; बिना उनके इस टकराव का स्थायी समाधान असंभव लगता है. दूसरी ओर, इस्लामिक स्टेट मुख्य विरोधी शक्ति है, जिसे कई देश जीतते देखना नहीं चाहेंगे. इसलिए सवाल यह है कि असद के निन्दक उनके साथ तालमेल बिठाने और इस संकट के राजनीतिक समाधान के लिए कोई क्षद्म प्रतिनिधि बनाने के लिए तैयार हैं या नहीं. शायद अब यही एकमात्र उपाय है.

(द हिंदू बिजनेसलाइन  में प्रकाशित. अनुवाद – दिगम्बर)

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