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मजदूरों का अपना त्यौहार


(मई दिवस का यह गीत वाल्टर क्रेन ने 1894 में लिखा था.)










दुनिया के मजदूरो, सारे बंधन तोड़ के,
इस दिन अपने सभी काम ठप्प करो,
जाड़े की ठिठुरन को छोड़ते हुए पीछे,
आगे बढ़ो प्रसन्न सूरज कि गर्मी में.
एक बार फिर, जब हमारी हरी-भरी धरती,
उल्लसित है मई की कलियों और फूलों के बीच,
उमंग और उत्साह से गूंजने दो समवेत स्वर,
मनाओ विश्व मजदूर दिवस का अपना त्यौहार.
लहराने दो हवाओं को दुनिया भर में,
संघर्ष और आशा के सन्देश लिए झंडे,
फूल-मालाओं से सजी मई दिवस पताका,
फ़ैलाए दूर-दूर तक अपना सन्देश.
अंकित है हर लहराती पट्टी पर,
धड़कती मुक्ति के निर्मल ह्रदय से,
भले ही दूर है अभी हमारा राज,
आएगा सबके एकजुट प्रयास से ही.
 तुम्हारा लक्ष्य सकल विश्व की आशा है,
तुम्हारे संघर्ष में हैं मानव जाति की उम्मीदें,
मजदूरों की आज़ादी का लहराता झंडा,
उज्ज्वल भविष्य की दुल्हन का घूँघट है.
चाहे अधिक या थोड़े, एकजुट हैं जो साथी,
आज वे खुल कर दें अपना सन्देश,
बसंत के सभी पंछी एक समान पंखों वाले,
गाएँ मिलकर मई दिवस का गीत.
नवजीवन यदि अभी तक नहीं है सामने,
सुनाई दे रही है इसकी आहट,
जगती है नई उम्मीद खुद ब खुद,
जैसे समुद्र तट पर आती हैं लहरें.
मजबूती से डटे रहो अपनी जगह,
कायम करो प्रबल एकता अपनी,
जोड़ो अपने हाथों की विश्वव्यापी कड़ी,
चाहते हो अगर अपनी आशा का प्रतिदान.
जब दुनिया के सभी मजदूर, भाई-बहन,
मिल कर रचेंगे, आनेवाले समय में,
जीवन का सुखद आवास- दूसरोंके लिए नहीं,
क्योंकि धरती और खुशहाली होगी सबकी.
– वाल्टर क्रेन (मजदूरों की मई-पताका)
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