Monthly Archives: January 2015

2014 in review

The WordPress.com stats helper monkeys prepared a 2014 annual report for this blog.

Here’s an excerpt:

A New York City subway train holds 1,200 people. This blog was viewed about 6,400 times in 2014. If it were a NYC subway train, it would take about 5 trips to carry that many people.

Click here to see the complete report.

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जिनके पास कम है, वे कम खाएँ (अमरीकी शासकों के प्रति) –मार्ज पियर्सी

Marge+Piercy

ग़रीबों से नफरत, क्या ये गुनाह

बासी हो गया? कि इतना धन है

फिर भी  साजिश रचते हैं दौलतमन्द

एक बच्चे की दवा, एक औरत की जिंदगी,

एक आदमी का दिल और गुर्दा हड़पने के लिए.

जब सांसद उस जनता की बात करते हैं

जो हिसाब बैठाती है गैस और रोटी का

कि ठण्ड और भूख में किसे तरजीह दें

वे गुर्राते हैं. हमारी ये हिम्मत की जिन्दा रहें?

अगर वे बमबारी कर पाते, अगर वे

ग़रीबों के खिलाफ लड़ाई छेड़ पाते

दूसरे देशों की तरह यहाँ, अपने देश में,

क़ानून बनाकर नहीं बल्कि खुलेआम

हथियारों से, तो क्या वे झिझकते?

उनके भीतर सुलगता सच्चा गुस्सा

फूटता है उन कटौतियों में, जो जरूरी हैं

लोगों को जिन्दा रखने के लिए.

जिन लोगों के पास बहुत कम है

उनको सजा देते हैं, और ज्यादा कमी करके-

हमें कुचलनेवाला एक विराट कानूनी बुलडोजर.

(अनुवाद — दिगम्बर)

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