अमरीका के अश्वेत और भूरे निम्न वर्ग के खिलाफ युद्ध का विरोध– अब हम और इंतजार नहीं कर सकते

Demonstrators stand in the middle of West Florissant as they react to tear gas fired by police during ongoing protests in reaction to the shooting of Brown, in Ferguson–रॉबिन डी.जी. केली

इंतजार करो। धैर्य रखो। शान्त रहो। अमरीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति ने कहा–– “यह एक ऐसा देश है जो सभी को अपने विचार व्यक्त करने की छूट देता है, उन्हें उन कार्रवाईयों के खिलाफ विरोध प्रकट करने के लिए शान्तिपूर्वक प्रदर्शन की इजाजत देता है जिन्हें वे अन्यायपूर्ण समझते हैं।” गडबड़ी मत फैलाओ, अपनी बात रखो । न्याय किया जायेगा। हम कानून की इज्जत करते हैं। यह अमरीका है।

हम सभी ग्रांड जूरी (उच्च न्यायालय) के फैसले का इंतजार कर रहे थे, इसलिए नहीं कि हममें से अधिकांश लोग अभियोग सिद्ध होने की उम्मीद रखते थे। जिला अटार्नी रॉबर्ट पी. मेककुलोच का लच्छेदार वक्तव्य यह समझाते हुए (या उसका बचाव करते हुए) कि कैसे ग्रांड जूरी अपने निर्णय पर पहुँची, एक विजयी भाषण जैसा था। ग्रांड जूरी के लिए यहाँ तक कि अनजाने में हत्या का मामूली सा आरोप भी न तलाश पाना एक आश्चर्यजनक उपलब्धि थी, तब जबकि पुलिस गोलीबारी में एक निहत्था किशोर कई गज दूर हाथ उठाये खड़ा था। बीस मिनट से भी कम समय में 4799 पेज की कार्यवाही का निचोड़ निकालते हुए, ग्रांड जूरी ने चश्मदीद गवाहों की सत्यता पर ही सवाल खड़े कर दिये, चैबीस–घंटे चलनेवाले समाचारों और सोशल मीडिया पर जाँच–पड़ताल को बाधित करने का इल्जाम लगाया और आस–पड़ोस में होनेवाली कथित हिंसा को इस बात के लिए जिम्मेदार ठहराया कि क्यों माइक ब्राउन की लाश को फुटपाथ से उठाने के लिए सुबह तक का इतंजार करना पड़ा। जब मेककुलोच ने अपने जीवन में कभी किसी पुलिसकर्मी को दोषी नहीं ठहराया, तो अब हम उससे कुछ अलग करने कि उम्मीद भला क्यों करते?

कुछ लोग एक चमत्कार की उम्मीद कर रहे थेय ज्यादातर लोग इसलिए इंतजार कर रहे थे कि एक संकट उमड़–घुमड़ रहा था। सेंट लुईस और आसपास के इलाकों में, और मिसौरी राज्य में भी, गोरे लोगों ने इस प्रतीक्षा काल का इंतजार युद्ध की तैयारी के लिए किया। निवासियों ने और ज्यादा बन्दूकें और गोलाबारूद खरीदा, दुकानों की खिड़कियों को बचाने के लिए प्लाइवुड का जखीरा इकठ्ठा किया, अलार्म सिस्टम लगवाये और खिड़कियों पर पट्टियाँ लगायीं, खाने–पीने का सामान इकट्ठा किया। गवर्नर जे. निक्सन ने आपातकाल की घोषणा कर दी, राज्य–भर से नेशनल गार्ड सुरक्षाबलों को बुला लिया और साथ ही दंगा नियंत्रण और जवाबी कार्रवाई के लिए राज्य की नागरिक सेना को ट्रेनिंग दी गयी। संघीय सरकार ने एफबीआई एजेंटों को भेज दिया, अनुमान है कि उनमें से कुछ गुप्त रूप से विरोध आन्दोलनों में काम कर रहे थे। जब मैं यह लेख लिख रहा हूँ तब प्रदर्शनकारियों और खासकर अश्वेत–समुदाय के खिलाफ सभी ताकतों को तैनात कर दिया गया है और गवर्नर ने और ज्यादा नेशनल गार्डों की टुकडियाँ भेजने का अनुरोध किया है।

इसी बीच, जब हम ग्रांड जूरी के निर्णय का इंतजार कर रहे थे तो क्लीवलैंड में एक 12 साल के अश्वेत लड़के तामीर राइस को गोली मारी गयी क्योंकि एक अधिकारी ने गलती से उसकी खिलौना बन्दूक को असली समझ लिया था । तामीर क्लीवलैंड के कडेल रिक्रियेसन सेंटर के बाहर खेल रहा था, जो उन कुछ सार्वजनिक जगहों में से एक थी जो बच्चों के लिए सुरक्षित जगहें हैं।

जब हम इंतजार कर रहे थे, तभी क्लीवलैंड के पुलिसकर्मियों ने एक 37 साल की अश्वेत औरत तनिषा एण्डरसन की जान ले ली जो मानसिक विकार (बाईपोलर डिसओर्डर) से पीड़ित थी। जब उसके घरवालों ने एक मुश्किल हालात में मदद के लिए 911 नम्बर पर फोन किया, तो पुलिस उसके घर पहुँची, लेकिन उसके साथ हमदर्दी का व्यवहार करने के बजाय उन्होंने वही किया जिसकी उन्हें प्रतिक्षण दिया गया था, यानी एक अश्वेत मुहल्ले में अश्वेत लोगों का सामना कैसे करना चाहिए। उन्होंने उसके साथ एक दुश्मन लड़ाके की तरह बरताव किया। जब वह उत्तेजित हो गयी तो एक अफसर ने उसे जबरन जमीन पर गिरा दिया और हथकड़ी पहना दी जबकि दूसरे अफसर ने उसके चेहरे को जमीन से सटा दिया और अपने घुटनों से उसकी पीठ दबाकर उसे 6 से 7 मिनट तक दबाए रखा, जब तक उसका शरीर शिथिल नहीं पड़ गया। उसने साँस लेना बन्द कर दिया। उन्होंने साँस चालू करने की कृत्रिम विधि से उसकी साँस चालू करने का कोई प्रयास नहीं किया। परिवारवालों और गवाहों को बताया कि वह सो रही है । आखिरकार 20 मिनट बाद जब एम्बुलेंस वहाँ पहुँची तो वह मर चुकी थी।

जब हम इंतजार कर रहे थे, तभी एन हार्बर, मिशिगन में पुलिस ने चालीस साल की एक अश्वेत औरत अयुरा रेन रोसर की हत्या कर दी। खबरों के अनुसार जब पुलिसकर्मी एक घरेलू हिंसा की शिकायत पर वहाँ पहुँचे तो वह हाथ में सब्जी काटनेवाला एक चाकू घुमा रही थी, हालाँकि उसके जिस पुरुष मित्र ने इस घटना की सूचना दी थी, उसने इस बात पर जोर दिया कि उससे पुलिसकर्मियों कोई खतरा नहीं है। इस बात से उनपर कोई फर्क नहीं पड़ा, उन्होंने गोली चला दी।

जब हम इंतजार कर रहे थे, तभी शिकागो के पुलिस अधिकारी ने 19 साल के रोशाद मेकिनटोश को गोलियों से गम्भीर रूप से घायल कर दिया। अधिकारी के दावों के बावजूद, कई चश्मदीद गवाहों ने बयान दिया कि मेकिनटोश निहत्था था, अपने हाथ ऊपर करके घुटनों के बल बैठा था और वह उस अधिकारी से गोली न चलाने की प्रार्थना कर रहा था।

जब हम इंतजार कर रहे थे, तभी साराटोगा स्प्रिंग्स, उटाह में पुलिस ने एक 22 साल के अश्वेत नौजवान डेरन हंट के शरीर में छह गोलियाँ उतार दीं, जो एक निंजा लड़ाके की तरह के कपड़े पहने हुए था और एक नकली समुराई तलवार लिये हुए था। इसी बीच विक्टरविले, कैलीफोर्निया में पुलिस ने 36 साल के एक अश्वेत आदमी और पाँच बच्चों के पिता दांते पार्कर को मार दिया। उसे एक चोरी के सन्देह में रोका गया, जब वह अपनी मोटरसाइकल पर जा रहा था । जब उसने “सहयोग करना” बन्द कर दिया तो अधिकारियों ने उसे काबू में करने के लिए बार–बार उस पर टेसर (बिजली के झटके देनेवाला एक हथियार) का इस्तेमाल किया। उन जख्मों की वजह से वह मर गया।

जब हम इंतजार कर रहे थे, तभी अठाईस साल के एक अश्वेत अकाई गरली का भी यही हाल हुआ जब वह ईस्ट न्यूयॉर्क, बु्रकलीन में लुईस एच. पिंक हाउसेस में सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था। पुलिस उस आवासीय परियोजना में टोह लेने की एक ठेठ मुहीम पर गयी थी । ऑफिसर पीटर लिआंग एक हाथ में बन्दूक और दूसरे हाथ में टार्च लेकर अँधेरी सीढ़ियों की तरफ बढ़ा। वह अपने सामने आनेवाले खतरे से निपटने के लिए मुस्तैद था। उदार मेयर बिल डीब्लासियो और पुलिस चीफ बिल ब्रांटन के अनुसार, गरली की मौत एक आनुसांगिक क्षति है। भरपूर क्षमा याचनाएँ की गयीं। गरली अपने पीछे एक दो साल की बेटी छोड़ गया।

जब हम इंतजार कर रहे थे, तभी एलऐपीडी (लॉस एंजेल्स पुलिस डिपार्टमेंट) अधिकारियों ने 25 साल के, एक मानसिक रूप से बीमार अश्वेत, इजेल फोर्ड को उसके अपने पड़ोस के दक्षिण लॉस एंजेल्स में रोका और गोली मार दी। एलऐपीडी ने लॉस एंजेल्स में रहनेवाले 37 साल के पिता ओमर अब्रेगो को रोका, और उसे पीट–पीटकर मार डाला।

जब हम इंतजार कर रहे थे और लगातार इंतजार कर रहे थे, तभी डैरेन विल्सन (माइक ब्राउन का हत्यारोपी पुलिसकर्मी) ने शादी कर ली, वह प्रशासनिक छुट्टी पर रहते हुए अपनी तनख्वाह भी लेता रहा और उसने अपने “बचाव” के नाम पर 4 लाख डॉलर से ज्यादा का चंदा भी हासिल कर लिया।

आप देख सकते हैं कि हम दर्जनों, सैकड़ों, हजारों अभियोगों और फैसलों का इंतजार कर रहे हैं। हर मौत कष्ट देती है। हर दोषमुक्त पुलिसकर्मी, सुरक्षाकर्मी और निगरानीकर्मी मन में आक्रोश पैदा करता है। ग्रांड जूरी के निर्णय ने ज्यादातर अश्वेतों को हैरान नहीं किया क्योंकि हम सजा सुनाये जाने का इंतजार नहीं कर रहे थे। हम न्याय का इंतजार कर रहे थे या ज्यादा सटीक तरीके से कहें, तो न्याय के लिए संघर्ष कर रहे थे। हम सभी नामों को जानते हैं और जानते हैं कि वे कैसे मरे। एरिक गार्नर, काजेमे पावेल, वोनडेरिट डी. मेयर्स जूनियर, जॉन क्राफोर्ड तृतीय, कैरी बाल जूनियर, माइक ब्राउन……..नामों की सूची अन्तहीन है। वे निहत्थे थे और उन्हें ऐसे हालात में गोली मार दी गयी जहाँ जानलेवा हमला जरूरी नहीं था। हम बार–बार आनेवाले दुस्वप्न की तरह उनके नामों को उठाये फिरते हैं, मुर्दों को घिनौने बेसबाल कार्डों की तरह एकत्रित करते हैं। कुछ नहीं भूलते। सिर्फ मुर्दा शरीरों का ढेर है जो हमारी पलक झपकते ही बढ़ जाता है। पिछली तीन पीढ़ियों के लिए, एलेनोर बम्पर्स, माइकल स्टीवर्ट, इयुला लव, अमादु डियालो, ऑस्कर ग्रांट, पेट्रिक डोरिसमंड, मेलिस ग्रीन, टाईशा मिलर, सीन बेल, आईअना स्टेनली–जोंस, मार्गरेट लावर्ने मिशेल इत्यादि, उनमें से कुछ नाम हैं जो नस्ली पुलिस हिंसा के प्रतीक हैं। और मैं सिर्फ मरे हुए लोगों की बात कर रहा हूँ उनकी नहीं जिन्हें परेशान किया गया, पीटा गया, अपमानित किया गया, रोककर जिनकी तलाशी ली गयी और जिनके साथ बलात्कार किया गया।

इसी बीच गवर्नर जे निक्सन, राष्ट्रपति ओबामा, अटार्नी जनरल एरिक होल्डर, मुख्यधारा की प्रेस और राज्य से पुरस्कृत हर अफ्रिकी–अमरीकी नेता अश्वेतों को शान्त रहने और अहिंसक बने रहने का उपदेश देते हैं, जबकि हिंसा का मुख्य कारण पुलिस है। माइक ब्राउन के कत्ल ने लोगों को सड़क पर ला दिया, जहाँ उनका सामना आँसू गैस और रबड़ की गोलियों से हुआ। एक ऐसी दुनिया में राष्ट्र द्वारा की जानेवाली हिंसा हमेशा ही अदृश्य बनी रहती है जहाँ पुलिस और सैनिक हीरो होते हैं और वे जो कुछ भी जो करते हैं उसे हमेशा ही “सुरक्षा,” संरक्षण और आत्मरक्षा के तौर पर दिखाया जाता है। पुलिस बेकाबू (अश्वेत) अपराधियों से नागरिकों की रक्षा करने और उनकी सेवा करने के लिए सड़कों पर उतरती है। इसलिए, हर बार पर पीड़ित को आक्रमणकारी दर्शाने का प्रयास किया जाता है। ट्रेवन मार्टिन ने फुटपाथ को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया और माइक ब्राउन ने अपने भारीभरकम शरीर को। एक अश्वेत आदमी के द्वारा आगे की तरफ लपकने या घूरने को एक आसन्न धमकी समझा जा सकता है। जब 9 अगस्त को माइक ब्राउन के कत्ल के बाद फर्गुसन के उपनगर भड़क उठे तब मीडिया और मुख्यधारा के नेता लूटपाट रोकने और “शान्ति” बनाये रखने के लिए ज्यादा चिंतित थे, बजाय इस तथ्य पर ध्यान दिये कि डैरेन विल्सन अपना वेतन प्राप्त करते हुए छुट्टी पर आजाद था। या इस बात के लिए कि खून से सने, मौत की वजह से अकड़ते, गोलियों से बिंधे, माइक ब्राउन के प्राणहीन शरीर का साढ़े चार घंटे तक पड़े रहना चैथे जेनेवा संधिपत्र का उल्लंघन किये जाने के कारण एक युद्ध अपराध है। आखिर यह एक सामुहिक सजा की कार्यवाही थी–– एक उत्पीड़ित लाश के सार्वजनिक प्रदर्शन का मकसद एक पूरे समुदाय को आतंकित करना था, हर किसी को अधीन करके दंडित करना था, बाकी लोगों को उनका अंजाम याद दिलाना था, अगर वे ठीक से व्यवहार नहीं करते हैं। हम इसे “गैरकानूनी ढंग से सजा देना” कहा करते थे।

युद्ध ? हाँ, युद्ध। माइक ब्राउन के कत्ल के बाद पुलिस के खिलाफ तत्कालीन और अनवरत संघर्ष राज्य और अश्वेतों के बीच के एक कम तीव्रता के युद्ध को प्रकट करता है, और ग्रांड जूरी के निर्णय के पश्चात प्रदर्शनकारियों पर किये गये असंगत बल प्रयोग ने संघर्ष को और भड़का दिया। पूरी दुनिया को फर्गुसन एक युद्ध क्षेत्र जैसा दिखाई दिया क्योंकि पुलिस अपने हेलमेटों, सुरक्षा जैकेटों, निजी हथियारों और एम–16 राइफलों के साथ सेना जैसी लगी। लेकिन फर्गुसन और सेंट लुइस में, और देश–भर की गरीब बस्तियों में, रहनेवाले अफ्रीकी–अमरीकी नागरिकों को यह जानने के लिए आँसू गैस या चेहरे छुपाकर दंगा पुलिसकर्मियों को सहन करने की जरूरत नहीं थी क्योंकि वे पहले से ही एक युद्ध क्षेत्र में रह रहे हैं पुलिस के प्रति माइक ब्राउन और डोरियन जोहनसन की शुरूआती घबराहट की वजह यही थी।

इस इलाके में अतीत और वर्तमान की पुलिस हिंसा ही ब्राउन और जोहनसन के विल्सन से डरने की असली वजह है। अभियोग पक्ष ने हत्या की इस वारदात को एक अठारह साल के भौचक्के और क्रोधित लड़के से खुद को बचने के लिए “एक कानूनी अधिकारी द्वारा हमले से पहले” अपनी आत्मरक्षा की कार्रवाई के रूप में, एक तर्कसंगत मामला बना कर पेश किया। विल्सन को अपनी जान का डर था, सिर्फ इतनी–सी बात उसके द्वारा किये गये जानलेवा हमले को जायज ठहराने के लिए काफी था। लेकिन वह तीन महीने लम्बे चलनेवाले विचार–विमर्श के अन्त में ग्रांड जूरी को दिये जानेवाले निर्देश थे, जिन पर हमें ध्यान देने की जरूरत है। जूरी के सदस्यों से यह कहने के बाद कि वे विल्सन की कार्रवाई को पुलिस द्वारा जानलेवा हमले पर मिसौरी अधिनियम के अनुसार फैसला करें, सहायक जिला प्रोसिक्यूटर, शीला विरली और काठी अलीजदेह ने अचानक घोषणा की कि “रिसर्च करने” पर उन्होंने पाया कि अमरीकी उच्चतम न्यायालय ने अधिनियम को हटा दिया है। निर्णय और पुराने अधिनियम के स्थान पर, विरली ने इस बात का वर्णन लिखा कि जब एक अधिकारी गिरफ्तारी करने के लिए बलप्रयोग करता है तो उस पर यह कानून कैसे लागू होता है। जब ग्रांड जूरी के एक सदस्य ने स्पष्टीकरण के लिए सवाल पूछने शुरू किये तो विरली ने समझाया कि पुराना कानून “पूरी तरह गलत या त्रुटीपूर्ण नहीं है, लेकिन कुछ ऐसा है जो ठीक नहीं है, इसलिए उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दें।” उसके बाद उसने संकेत दिया कि हम अमरीकी उच्चतम न्यायालय के टेनेसी बनाम गार्नर (1985) निर्णय पर निर्भर रहेंगे, “ऐसा नहीं है कि यह आपके लिए बहुत ज्यादा महत्त्वपूर्ण है ।…… हम कानून की क्लास शुरू नहीं करना चाहते ।” उसके बाद उसने आत्मरक्षा निर्देश पर ध्यान दिलाना शुरू कर दिया।

लेकिन निर्णय पर जल्दी से एक नजर डाल लेने से स्पष्ट हो जाता है कि इस आदेश का उद्देश्य जानलेवा हमले के इस्तेमाल को सीमित करना था, यह तर्क देते हुए कि एक भागते हुए संदिग्ध व्यक्ति को मारना एक अनुचित “हमला” है जो सम्भवत: जीने से वंचित करने के खिलाफ बने चैथे संशोधन का उल्लंघन है। अगर एक संदिग्ध व्यक्ति हथियारबन्द और खतरनाक नहीं है तो उस पर जानलेवा हमला करना न्यायसंगत नहीं है और इसलिए उसके जीवन पर हमला तर्कसंगत नहीं है।

चाहे इसे हम नशीली दवाओं के खिलाफ युद्ध कहें, या “ऑपरेशन घेटो स्टोर्म” कहें या माल्कॉम एक्स के शब्दों में ग्रासरूट मूवमेंट कहें, हम जिस चीज का सामना कर रहे हैं वह राज्य और उसके निजी सहयोगियों के द्वारा खासकर गरीबों और अधिकारहीन अश्वेत और भूरे मजदूर वर्ग के खिलाफ चलाये जा रहे स्थायी युद्ध से किसी भी तरह कम नहीं है। पाँच सदियों के दौरान, यह गुलामी और साम्राज्यवाद से लेकर विराट व्यवस्थागत अपराधीकरण तक फैला हुआ है। हम अपने बच्चों पर इसका प्रभाव देखते हैं, और कानून में इसका प्रभाव देखते हैं, जिसके तहत आसानी से किशोरों पर व्यस्कों की तरह अभियोग चलाये जाते हैंय जीरो टोलरेंस नीतियों की बाढ़ में इसका प्रभाव देखते हैं (जो एक बार फिर नशीली दवाओं के खिलाफ युद्ध का सह–उत्पाद है)य इस चैंका देनेवाले तथ्य में देखते हैं कि हिंसक अपराधों में उल्लेखनीय कमी के बावजूद निष्कासन और निलम्बन में कई गुणा बढ़ोत्तरी हुई है। अपराध, नैतिक घबड़ाहट, नवउदारवादी नीतियाँ और नस्लवाद मानवीय प्रबन्धन पर आधारित जेल में कैद करने, निगरानी, रोकथाम, दमन, जानलेवा कब्जे और भारी गलतबयानी की खर्चीली व्यवस्था की आग में पेट्रोल डालने का काम करते हैं।

फर्गुसन के अश्वेत समुदाय और उसके आसपास के समुदाय नियमित रूप से अन्य दूसरी चीजों के अतिरिक्त पुलिस द्वारा रोके जाने में, ध्वनि अध्यादेश के उल्लंघन (जैसे कि तेज आवाज में संगीत सुनना) के लिए, सेंट लुईस रेलों में चलती रेल में चढ़ने, घास न कटी होने या घर गन्दा होने पर, अनाधिकार प्रवेश पर, “झोलदार पैंट” पहनने पर, ड्राइविंग लाइसेंस या पंजीकरण समाप्त हो जाने पर, “शान्ति भंग करने” पर लगाये गये जुर्माने में हर दिन इस युद्ध का अनुभव करते हैं। यदि ये जुर्माने अदा नहीं किये जाते तो इससे जेल जाना पड़ सकता है, अपनी कार या सम्पत्ति को गँवाना पड़ सकता है, या सामाजिक सेवा के लिए अपने बच्चों को खोना पड़ सकता है। अपराधिक न्याय व्यवस्था गरीब और मजदूर अश्वेतों से सजा और शुल्क के माध्यम से एक तरह का नस्ली कर वसूलती है। 2013 में, फर्गुसन के नगरपालिका न्यायालय ने 21,000 से कुछ ही ज्यादा लोगों को लगभग 33,000 गिरफ्तारी वांरट जारी किये, जिससे नगरपालिका को लगभग 26 लाख डॉलर प्राप्त हुए। इसी साल, फर्गुसन में तलाशी के 92 प्रतिशत और यातायात उल्लंघन रोकने के 86 प्रतिशत मामलों में अश्वेत शामिल थे, इस तथ्य के बावजूद कि हर तीन में से एक गोरा आदमी गैरकानूनी हथियार या नशीली दवाओं के साथ पाया गया, जबकि हर पाँच में से सिर्फ एक अश्वेत नियम विरुद्ध था।

फिर भी, यथास्थिति के समर्थक हमेशा ही राज्य हिंसा के आलोचकों को कम आयवाले अश्वेत समुदायों में होनेवाली आपसी नस्ली हत्याओं की संख्या का हवाला देकर भटकाने की कोशिश करते हैं। न्यूयॉर्क के भूतपूर्व मेयर रूडी गुलियानी के हालिया शातिराना ताने को कौन भूल सकता है जो उन्होंने माइकल एरिक डाइसन के “प्रेस से मिलें” कार्यक्रम में किया–– “गोरे पुलिस अधिकारी वहाँ (अश्वेतों के इलाकों में) नहीं होते अगर आप एक–दूसरे को नहीं मार रहे होते ।” निश्चित रूप से यह एक नस्लवादी शेखी है, लेकिन इस तरह के कथन इस बात की गहन पूछताछ को रोकने में सफल हो जाते हैं कि कैसे नवउदारवादी नीतियाँ (जैसे कल्याणकारी राज्य का विखंडन, पूँजी के पलायन को प्रोत्साहित करना, सार्वजनिक स्कूलों, अस्पतालों, घरों, पारगमन और दूसरे सार्वजनिक संसाधनों का निजीकरण, पुलिस और जेलों में पूँजी निवेश, इत्यादि) एक तरह की राजकीय हिंसा है जो अभावग्रस्तता, पर्यावरण और स्वास्थ्य संकट, गरीबी तथा हिंसा और दमन पर आधारित वैकल्पिक (गैरकानूनी) अर्थव्यवस्था को जन्म देती है।

गुलियानी के व्यंग्यात्मक अपशब्द आधुनिक कानून व्यवस्था की असफलता का एक दमदार मामला है। अगर पुलिस की जिम्मेदारी शान्ति बनाये रखना और नागरिकों की रक्षा करना है, लेकिन इसके बजाय वे हिंसक मौतों की “महामारी” फैलाने में योगदान करती है, तो यह अश्वेतों और भूरे लोगों के इलाकों से पुलिस को पूरी तरह हटा लेने का मामला बनता है। पुलिस को लड़ाई का प्रशिक्षण दिया जाता है और पुलिसकर्मी अक्सर कम आयवाले नस्ली समुदायों के युवाओं को सम्भावित शत्रु समझते हैं। इसलिए अँधेरी सीढ़ियों में एक “बेगुनाह” काले आदमी का, सब्जी काटनेवाला चाकू लिये एक अश्वेत महिला का, या खिलौना बन्दूक से खेलते हुए छोटे बच्चों का कत्ल कोई दुर्घटना नहीं है। पुलिसकर्मी इन इलाकों में हाथ में हथियार लेकर गश्त करते हैं, उन्हें हर छाया के पीछे एक संदिग्ध छिपा हुआ दिखाई देता है और युद्ध में या तो मरना होता है या मारना होता है।

डैरेन विल्सन को माइक ब्राउन के कत्ल से सजा न सुनाये जाने की रोशनी में, उन लोगों के द्वारा जो राजकीय हिंसा से आतंकित है और विशेष तौर पर अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस करते हैं, मिसौरी में पुलिस को हटा लेने का आह्वान–– अस्थायी तौर पर ही सही–– एक वाजिब माँग है। वे कानून और व्यवस्था चाहते हैं, लेकिन पुलिस ने लगातार कानून का अनादर किया है और लगभग बिना किसी जवाबदेही के कार्यवाही की है। पुलिस ने एक अनियंत्रित संगठन की तरह काम किया, उनकी कार्यवाही ने अव्यवस्था और भय पैदा किया। इसके अतिरिक्त, प्रभावी रूप से अभियोग न लगने से पुलिस फोर्स निर्दाेष साबित हो जाती है, जिससे अश्वेतों के जीवन की रक्षा करने और न्याय दिलवाने में सरकार की असफलता से उपजे क्रोध और निराशा की कानूनी अभिव्यक्ति का जवाब देते वक्त पुलिस को हिंसा और दमन का और ज्यादा इस्तेमाल करने का बहाना मिल जाता है। पहले ही ग्रांड जूरी के निर्णय के परिणामस्वरूप ऐसा हो रहा है, जब दंगा पुलिस ‘हेंड्स अप यूनाईटेड’ और उसके साथ–साथ दूसरे सुरक्षित स्थानों पर धावा बोल रही है।

हेंड्स अप यूनाईटेड, लॉस्ट वॉइसेज, ऑर्गनाइजेशन फॉर ब्लैक स्ट्रगल, डोंट शूट कोलिशन, मिलेनियल एक्टिविस्ट यूनाईटेड, और उनके जैसे दूसरे संगठनों के युवा संगठनकर्ता समझते हैं कि वे युद्ध की स्थिति में हैं। टेफपो, टोरी रसेल, मोंटेग्यु सिमंस, चेयेने ग्रीन, एश्ले येट्स, और सेंट लुईस इलाके के अनेकों दूसरे युवा अश्वेत कार्यकर्ता अभियोग का इंतजार नहीं कर रहे हैं। न ही वे दिखावटी संघीय जाँच का इंतजार नहीं कर रहे हैं, उन्हें उस संघीय सरकार के बारे में कोई भ्रम नहीं है जो स्थानीय पुलिस को सैन्य साजोसामान प्रदान करती है, जेलें बनाती है, जो बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हजारों लोगों को चालकों और चालकरहित जहाजों से मारती है, और जो इजराइल को उसके गैरकानूनी युद्ध और कब्जे के लिए हथियारबन्द करती है। वे संगठित हो रहे हैं । साथ ही शिकागो के वे सक्रिय कार्यकर्ता भी संगठित हो रहे हैं जिन्होंने वी चार्ज जेनोसाइड और ब्लैक यूथ प्रोजेक्ट की स्थापना की, और लॉस एंजेल्स के युवा जिन्होंने कम्युनिटी राइट्स कैम्पेन बनाया, और देश–भर के सैकड़ों ऐसे संगठन जो प्रतिदिन राजकीय हिंसा और कब्जे को चुनौती दे रहे हैं। वे हमें याद दिलाते हैं कि न सिर्फ अश्वेतों का जीवन महत्त्वपूर्ण है (यह तो स्पष्ट ही है), बल्कि यह कि प्रतिरोध का अपना महत्त्व है। इसका महत्त्व है, क्योंकि हम अभी भी अधिवासी उपनिवेशवाद, नस्ली पूँजीवाद और पितृसत्ता के परिणामों के साथ संघर्षरत हैं। कैटरिना के बाद के न्यू ओरलियंस में इसका महत्त्व था जो कामकाजी लोगों पर नवउदारवाद के निरंतर चलनेवाले युद्ध की एक मुख्य रणभूमि है और जहाँ अश्वेत संगठनकर्ता बहुनस्ली गठबन्धनों का नेतृत्व करते हुए स्कूलों, अस्पतालों, सार्वजनिक पारगमन और सार्वजनिक घरों के निजीकरण तथा सार्वजनिक क्षेत्र की यूनियनों को खंडित करने का विरोध कर रहे हैं। फर्गुसन के युवा प्रचंडता के साथ अपना संघर्ष जारी रखे हुए हैं, सिर्फ माइक ब्राउन के लिए न्याय पाने और पुलिस दुर्व्यवहार को खत्म करने के लिए ही नहीं बल्कि वे नस्लवाद को हमेशा के लिए खत्म कर देने के लिए, साम्राज्य का अन्त करने के लिए और अन्तत: युद्ध को खत्म करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

(काउन्टरपंच डॉट कॉम से साभार । अनुवाद–दिनेश पोसवाल)

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