Monthly Archives: मई 2014

लाल हमारा रंग – ए.एन.सी. कुमालो

gulmohar

हमें ऐसी कविताओं की जरूरत है

जिनमें खून के रंग की आभा हो

और दुश्मनों के लिए आती हो जिनसे

यमराज के भैंसे की घंटी की आवाज

 

कविताएँ

जो आतताइयों के चेहरे पर

सीधा वार करती हों

और उनके गरूर को तोड़ती हों

 

कविताएँ

जो लोगों को बताएँ

कि मृत्यु नहीं, जीवन

निराशा नहीं, आशा

सूर्यास्त नहीं, सूर्योदय

प्राचीन नहीं, नवीन

समर्पण नहीं, संघर्ष

 

कवि, तुम लोगों को बताओ

कि सपने सच्चाई में बदल सकते हैं

तुम आजादी की बात करो

और धन्नासेठों को सजाने दो

थोथी कलाकृतियों से अपनी बैठकें

 

तुम आजादी की बात करो

और महसूस करो लोगों की आँखों में

जनशक्ति की वह ऊष्मा

जो जेल की सलाखों को

सरपत घास की तरह मरोड़ देती है

ग्रेनाइट की दीवारों को ध्वस्त करके

रेत में बदल देती है

 

कवि,

इससे पहले कि यह दशक भी

अतीत में गर्क हो जाय

तुम जनता के बीच जाओ और

जन संघर्षों को आगे बढ़ाने में

मदद करो !

 

 

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