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तुम्हारी तरह – रॉक डाल्टन

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(रॉक डाल्टन (1935-1975) साल्वाडोर के कवि और पत्रकार थे. राजनीतिक गतिविधियों के कारण उन्हें अक्सर कैद किया जाता रहा. एकाधिक बार उन्हें फाँसी की सजा होते-होते बची. एक बार तो तब, जब भूकम्प के चलते उस जेल की दीवार ढह गयी जिसमें वे कैद थे. उनकी जिंदगी का बड़ा भाग जलावतनी में गुजरा और मौत हुई अपने ही देश के एक अन्य गुरिल्ला गुट के हाथों. 

रॉक डाल्टन की कविता प्रेम, संघर्ष, राजनीति और जिंदगी की कविता है. उनका यह कथन कि “कविता, सबके लिए है, जैसे रोटी,” पूरे लातिन अमरीका में एक लोकप्रिय नारा बन गया है.)

तुम्हारी तरह मैं भी
प्यार करता हूँ-
प्यार, जिंदगी, चीजों की सुगंध
आकाश के नीलेपन
और जनवरी के भू-दृश्य से.

और मेरा खून खौलता है
और मैं हँसता हूँ उन आंखों से
जिन्हें मालूम है आँसू की कलियों का मर्म.
मैं मानता हूँ दुनिया खूबसूरत है
और कविता, सबके लिए है, जैसे रोटी.

और यह भी कि मेरी रगें ख़त्म नहीं होतीं मुझ में
बल्कि उन तमाम बेनाम लोगों के लहू में
जो लड़ रहे हैं जिंदगी,
प्यार,
छोटी-छोटी चीजों,
भू-दृश्य और रोटी,
और सबके लिए कविता की खातिर.

(अनुवाद – दिगम्बर)

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