Monthly Archives: July 2013

मैं तुम्हें प्यार करता हूँ – नाजिम हिकमत

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घुटनों के बल बैठा-
मैं निहार रहा हूँ धरती,
घास,
कीट-पतंग,
नीले फूलों से लदी छोटी टहनियाँ.
तुम बसंत की धरती हो, मेरी प्रिया,
मैं तुम्हें निहार रहा हूँ.

पीठ के बल लेटा-
मैं देख रहा हूँ आकाश,
पेड़ की डालियाँ,
उड़ान भरते सारस,
एक जागृत सपना.
तुम बसंत के आकाश की तरह हो, मेरी प्रिया,
मैं तुम्हें देख रहा हूँ.

रात में जलाता हूँ अलाव-
छूता हूँ आग,
पानी,
पोशाक,
चाँदी.
तुम सितारों के नीचे जलती आग जैसी हो,
मैं तुम्हें छू रहा हूँ.

मैं काम करता हूँ जनता के बीच-
प्यार करता हूँ जनता से,
कार्रवाई से,
विचार से,
संघर्ष से.
तुम एक शख्शियत हो मेरे संघर्ष में,
मैं तुम से प्यार करता हूँ.

(अनुवाद- दिगम्बर)

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जिसे वे भगवान की लीला कहते हैं – मार्ज पियर्सी

जिसे वे भगवान की लीला कहते हैं - मार्ज पियर्सी

कितना खूबसूरत और जानलेवा है बर्फ.
सड़कें समा गयी हैं इसकी सुरंग में.
बिना बिजली-पानी हजारों हजार लोग
जमी हुई दुनिया में जहाँ भेड़ियों के झुण्ड
की तरह हुंआ-हुंआ करती है हवा.

पहले ही बेइन्तेहाँ हैं ठण्ड से हो रही मौतें
जिसका मतलब है फटे-पुराने कम्बल में
किकुडते, ठिठुरते लोगो की जमघट,
कंपकंपाते बच्चे बंद कर देते हैं कांपना
ठण्ड से अकड़कर समा जाते हैं मौत के मुँह में.

ऊपर से गुजरते बिजली के तारों को
जमीन में दाबना बहुत खर्चीला है,
कहते हैं बिजली कम्पनी के अधिकारी,
जो नहीं झेलते बिजली-पानी का आभाव,
जिन्हें दुबकना नहीं पड़ता ठन्डे अँधेरे में.

आभाव का कोई असर नहीं जिन पर, आभाव
से मरते नहीं जो लोग, वही लेते हैं फैसले.
हम यकीन नहीं करते जलवायु परिवर्तन में
और यही नहीं, लागत और मुनाफे का
अनुपात हमें मुनाफा भी तो देता है.

कृषि व्यापारियों के पानी चुराने और
रिहायशी इलाकों में लॉन की हरियाली के कारण
पड़नेवाला सूखा. घटिया दर्जे के बांधों के चलते
बहते-ढहते मकान. न्यू ओर्लियांस में होता है
पुनर्निर्माण धनाढ्यों और पर्यटकों के लिये

सड़ने और मातम मानने दो गरीब बस्तियों को.
बीमा कम्पनी को आशा है कि उनके भुगतान
की तारीख आते-आते आप बूढ़े हो जायेंगे.
राजनेता दाबे बैठे हैं पुनर्निर्माण का पैसा.
और हम कहते हैं इसे प्राकृतिक आपदा.

(अमरीकी कवियत्री मार्ग पियार्सी के अठारह कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. यह कविता मंथली रिव्यू से आभार सहित लिया गया है. अनुवाद- दिगम्बर)

नाजिम हिकमत की कविता- डॉन क्विग्जोट

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अमर नौजवानों के शूरवीर
पचास की उम्र में पाया कि उसका दिमाग है
उसके दिल में
और जुलाई की एक सुबह निकल पड़ा
सही, सुन्दर और जायज चीजों पर कब्ज़ा करने.

उसके सामने थी पागल और मगरूर दानवों की एक दुनिया,
वह अपने मरियल, लेकिन बहादुर रोसिनान्ते पर सवार.
मैं जानता हूँ किसी चीज की ख्वाहिश का मतलब,
लेकिन अगर तुम्हारे दिल का वजन सिर्फ एक पौंड सोलह औंस है,
तो मेरे डॉन, इन बेहूदी पवनचक्कियों से लड़ना,
कोई समझदारी की बात नहीं.

मगर तुम ठीक कह रहे हो, यकीनन दुल्सीनिया तुम्हारी औरत है,
इस दुनिया में सबसे खूबसूरत,
मुझे यकीन है कि तुम यह बात
गली के दुकानदारों के मुँह पर कहोगे चीखते हुए,
लेकिन वे तुम्हें गिराएँगे घोड़े से खींच कर
और बुरी तरह पीटेंगे.
मगर तुम, हमारे अभागे अजेय शूरवीर,
दमकते रहोगे अपने भारी-भरकम लोहे की टोप में
और दुल्सीनिया और भी खूबसूरत हो जायेगी.

(अंग्रेजी से अनुवाद- दिगम्बर)

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